Akbar Birbal Ki Kahani

Akbar Birbal Ki Kahani– यहाँ हम आपके लिए इस लेख में Akbar Birbal Ki Kahani लाये है। यह एक छोटी सी कहानी है जिससे हमे सीख मिलती है की हमे दुसरो पे नजर रखने से ज्यादा अपने काम में ध्यान देना चाहिए।

Akbar Birbal Ki Kahani- चार मूर्ख

अपनी बुद्धिमत्ता के लिए जाने जाने वाले बादशाह अकबर अक्सर अपने दरबारियों की बुद्धि की परीक्षा लेते थे, लेकिन उनके पसंदीदा सलाहकार बीरबल की बुद्धि और चतुराई की बराबरी कोई नहीं कर पाता था।

एक दिन, जब अकबर अपने महल के बगीचों में टहल रहा था, तो उसने मूर्खता की प्रकृति पर विचार किया। वह बीरबल की ओर मुड़े और पूछा, “बीरबल, क्या तुम कल शाम तक मेरे राज्य में चार मूर्ख ढूंढ सकते हो?”

बीरबल, जो कभी भी किसी चुनौती से पीछे नहीं हटते थे, ने उत्तर दिया, “बेशक, महाराज। मैं कल शाम तक उन्हें आपके लिए इकट्ठा कर दूंगा।”

अगले दिन, बीरबल उन चार मूर्खों को ढूंढने निकले जिनके लिए बादशाह ने अनुरोध किया था। वह हलचल भरे बाज़ार में गया और उसे एक आदमी मिला जो दर्पण में अपना प्रतिबिम्ब दिखाकर जोर-जोर से बहस कर रहा था। उस आदमी का मानना था कि वह किसी और को मात देने की कोशिश कर रहा था, जबकि वास्तव में, वह केवल खुद से बहस कर रहा था। बीरबल उनके पास आये और बोले, “हुजूर, बादशाह आपसे महल में मिलना चाहते हैं।”

पहला मूर्ख, कारण से बेखबर, सहमत हो गया और बीरबल के पीछे महल तक चला गया।

इसके बाद, बीरबल पास के एक गाँव में गए और उनका सामना एक ऐसे व्यक्ति से हुआ जो एक कुएं में बाल्टी से पानी भरने की कोशिश कर रहा था। कुआँ पहले से ही भरा हुआ था, लेकिन वह आदमी उसमें पानी डालना जारी रखने पर अड़ा रहा। बीरबल ने उसके पास आकर कहा, “मेरे दोस्त, बादशाह महल में आपकी उपस्थिति का अनुरोध करते हैं।”

दूसरा मूर्ख भी, स्थिति से अनजान, बीरबल के साथ महल में जाने के लिए तैयार हो गया।

जब बीरबल दो मूर्खो को ले कर दरबार में पंहुचा तो अकबर ने कहा यहाँ तो अभी दो ही है बाकि के दो कहाँ है।  उसपे बीरबल ने जवाब दिया महाराज आप पहले इन दो से सवाल जवाब कर लीजिये बाकि के दो भी यही है।

फिर अकबर ने उनसे पूछा, “तुम लोग ऐसी मूर्खतापूर्ण हरकतें क्यों करते हो?”

पहला मूर्ख, वह व्यक्ति जिसने अपने प्रतिबिंब के साथ तर्क किया, उत्तर दिया, “मैं दुनिया के सबसे चतुर व्यक्ति, महामहिम को मात देने के लिए तर्क दे रहा हूं।”

कुआँ भरने वाले दूसरे मूर्ख ने कहा, “महाराज, मैं कुआँ खाली करने की कोशिश कर रहा हूँ।”

उनके जवाबों से चकित होकर बादशाह अकबर बीरबल की ओर मुड़े और बोले, “जैसा कि मैंने अनुरोध किया था, तुम्हें  दो मूर्ख तो मिल गए  लेकिन बाकी के दो मुर्ख कहाँ हैं।”

ऐसा कहते ही बीरबल ने माफ़ी मांगते हुए कहाँ की महाराज मुझे माफ़ कीजिये लेकिन बाकि के दो मुर्ख आप और मैं स्वयं हूँ। बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर हैरान रह गए और बोले बीरबल तुम ऐसा कैसे कह सकते हो। इस पर बीरबल ने जवाब दिया महाराज हमारे राज्य में हमारे पास इतने जरुरी कार्य है लेकिन आप और मैं मूर्खो को ढूंढ़ने में अपना समय व्यर्थ कर रहे हैं।  तो हुए न हम बाकि के दो मुर्ख। बादशाह अकबर को बीरबल की बात समझ आ गयी और अपनी गलती का भी अहसास हुआ।

बीरबल की अंतर्दृष्टि से प्रभावित होकर बादशाह ने एक बार फिर उनकी बुद्धिमत्ता को स्वीकार किया, यह जानकर कि उनके सलाहकार ने एक बार फिर उनकी चतुराई और बुद्धि को साबित कर दिया है।

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